लफ़्ज़ और अल्फ़ाज़

कभी ग़ौर किया क्या?

शुक्रिया अदा करते वक्त,

दिल होता है पाक-साफ़।

शिकायतें-शिकवे आते नहीं ज़ेहन में।

एहसानमंद अल्फ़ाज़ों में होती है रूहानियत।

वे नहीं करते दिल दुखाने का गुनाह।

क़ुसूरवार तो होते हैं कड़वे-कृतघ्न दिलों से

निकलते चासनी डूबे, हिजाब ओढ़ें लफ़्ज़।

Gratitude is the healthiest of all human emotions.”

Zig Ziglar

क़तरा-ए-कालकूट

अर्थ – क़तरा- बूँद ड्रॉप, कालकूट – ज़हर poison, कैफ़ियत- बहाना excuse, रूह – आत्मा soul, अल्फ़ाज़ -शब्द .

अनकहे अल्फ़ाज़

बोलतीं आँखे,

लरजते लब,

हथेलियाँ आपस में फँसी,

बेचैन अंगुलियाँ,

ज़मीन खुरचते पैर के अँगूठे,

बहुत कुछ कहते है …….

फिर भी अनकहे अल्फ़ाजों

को सुनना ज़रूरी क्यों है?