अन्त:मन

फारसी कवि उमर खय्याम की रूबैयात जीवन की संक्षिप्तता अौर अल्प अस्तित्व को दर्शाता है । कवि के लिए, जीवन एक शाश्वत वर्तमान है, जो अतीत और भविष्य दोनों से परे है।

Rate this:

इस जीवन के बाद के जीवन के सत्य को जानने की लालसा में

         अपने अदृश्य आत्मा…..अंतरात्मा को टटोला।

                        अन्त:मन से जवाब मिला- 

                                 स्वर्ग-नर्क, जन्नत-दोजख सब यही हैं, हमारे अंदर है

I sent my Soul through the Invisible,
Some letter of that After-life to spell:
And by and by my Soul return’d to me,
And answer’d: ‘I Myself am Heav’n and Hell

 Omar Khayyám ❤

Translation by- Rekha Sahay          

Image courtesy – Aneesh

प्रतिपदा का चाँद

प्रतिपदा का कमज़ोर, क्षीण चाँद

थका हारा सा अपनी

पीली अल्प सी चाँदनी ,

पलाश के आग जैसे  लाल फूलों पर

बिखेरता हुआ बोला –

बस कुछ दिनो की बात है .

मैं फिर पूर्ण  हो जाऊँगा।

मेरी चाँदी सी चाँदनी हर अोर बिखरी होगी .

 

प्रतिपदा – पक्ष की पहली तिथि।