ग़र जीवन का अर्थ खोजना है!

खोने का डर क्यों? साथ क्या लाए थे।

क्या कभी बिना डरे जीने कोशिश की?

तब तो फ़र्क़ समझ आएगा।

इस जहाँ में आए, सब यहाँ पाए।

सब यही छोड़ जायें।

यही कहती है ज़िंदगी।

ग़र जीवन का अर्थ खोजना है।

एक बार ज़िंदगी की बातें मान

कर देखने में हर्ज हीं क्या है?

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जिंदगी के रंग -205

जीवन में खुश रहने और  सार्थकता ढूंढने में क्या अंतर हैं? 

क्या दोनों साथ-साथ चल सकतें हैं? 

अर्थपूर्णता…सार्थकता के खोज  में अतीत, वर्तमान और भविष्य शामिल होतें हैं।

इसके लिये सही-गलत सीखना पङता है

 खुशियों  के लिये कोई समय, सही-गलत,  कोई शर्त नही होती।

खुशियाँ अपने अंदर होतौं हैं, किसी से मांगनी नहीं पङती है।

सार्थकता जुड़ा है – कर्तव्य,  नैतिकता से।

सार्थकता और अर्थ  खोजने में कभी-कभी  खुशियाँ  पीछे छूट जाती है।

पर जीवन से संतुष्टि के लिये दोनों जरुरी हैं। 

 

 

 

 

जिंदगी के रंग -204

जीवन है इसलिए परेशनियाँ हैं.

जीवन का अर्थ है सीखना अौर आगे बढ़ना ।

हम सजीव हैं, इसलिए चुनौतियाँ हैं.

बदलते रहते जीवन की चुनौती है हर पल में हौसला बनाये रखना।

हम हैं, क्योंकि अपनों ने हमें ऐसा बनाया.

अतः जीवन सार है अौरों की मदद करना।

दुःख है, इसलिए ख़ुशियों का मोल है.

जीवन का रहस्य है खुश रहना।

प्यार है इसलिए जीवन का अस्तित्व है.

अतः जीवन का सौंदर्य प्रेम है।

जीवन जी कर, जीवन का अर्थ जाना !

जीवन जी कर,

जीवन का अर्थ मिला.

पुरस्कार या पैसे जीवन

जीने के लिए ज़रूरी हो सकता है.

लेकिन मन की शांति के लिए

अपनापन,सहानुभूति पूर्ण व्यवहार

और मधुर रिश्ते मायने रखते हैं.