जिंदगी के रंग- 193

हम कभी क़ैद होते है ख्वाबों, ख्वाहिशों , ख्यालों, अरमानों में।

कभी होते हैं अपने मन अौर यादों के क़ैद में।

हमारी रूह शरीर में क़ैद होती है।

क्या हम आजाद हैं?

या पूरी जिंदगी ही क़ैद की कहानी है?

 

 

बदलाव

उम्र ने बहुत कुछ बदला –

जीवन, अरमान, राहें…….

समय – वक़्त ने भी कसर नहीं छोड़ी –

मौसम बदले, लोग बदले………

मन में यह ख़्याल आता है –

इतना ख़्याल ना करें, इतना याद ना करें किसी को …..

पर आँखे बंद करते –

मन बदल जाता है, ईमान बदल जाते हैं .

 

 

 

 

सङकें

धूप सेंकते मोटे अजगर सी

बल खाती ये काली अनंत

अंतहीन सड़कें

लगतीं है ज़िंदगी सी ……

ना जाने किस मोड़ पर

कौन सी ख़्वाहिश

मिल जाए .

कभी ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बनाए

और कभी उन्हें पूरा करने का

अरमान बोझ बढ़ाए .

गुल्लक अरमानों का

एक था गुल्लक .

अरमानों का.

आधे अधूरे और कुछ पूरे

अरमानों को डालते डालते ,

कब वक़्त गुज़र गया ,

पता नहीं .

जब गुल्लक फूटा….

नज़रों के सामने

बिखरे गये अरमान अनेक .

गुड़िया सजाने ,

पड़ोस के बाग़ से अमरूद चुराने ,

अौर ना जाने कितने सारे अरमान ……

सब पुराने….. बेकार ……

एक्सपायर हो चुके थे .