तुम उस बारिश की तरह हो

जो सोन्धी सी ख़ुशबू बिखेर जाती है।

जो मेरी बालकोनी की फ़र्श आईना बना

मेरा अक्स अपने वजूद में झलका जाती है।

Topic- YourQuote

दर्पण का सच !

जब सच्चा अक्स देखना या दिखाना हो,

 तब आईना याद आता है।

पर सब  भूल जाते हैं दर्पण तो छल करता है।

वह हमेशा उलटी छवि दिखाता है। 

  इंसानों की फितरत भी ऐसी होती है शायद ।

पर अंतर्मन….अपने मन का  आंतरिक दर्पण क्या कहता है?

वह तो कभी छल नहीं करता।