रावण दहन

लोगों की ओर जल कर गिरते, बिखेरते आतिशो ने,

रावण से पूछा ये क्या कर डाला?

जवाब मिला –

तुम सब युगों-युगों से जला रहे है मुझे।

मैंने भी वही किया, तो बुरा क्यों मान गए?

सामने राम तो नज़र आए नहीं कहीं।

पर छुपे थे कईयों के अंदर अंश हमारे, कई रावण।

अंश

कई बार मर- मर कर जीते जीते,
मौत का डर नहीं रहता.
पर किसी के जाने के बाद
अपने अंदर कुछ मर जाता है.
….शायद एक अंश अपना.
वह ज़िंदगी का ना भरने वाला
सबसे बड़ा ज़ख़्म, नासूर  बन जाता है.