अँधेरा

अँधेरा अच्छा नहीं लगता,  पर अफसोस,

रोशनी में कई चेहरे बेपर्द हो जातें हैं।

 

 

 

 

Image courtesy – Aneesh

चाँद मिला राहों में….

एक दिन, चाँद मिला राहों में.

पूछा उसने – इतनी रात में अकेले ?

तुम्हें अँधेरे से डर नहीं लगता क्या ?

जवाब दिया हमनें – तुम भी तो अकेले हो,

स्याह रातों में…..

तुमसे हीं तो सीखा है,

अँधेरे में भी हौसले से अकेले रहना.

दीवाली अौर दीये !

हमने खुद जल कर उजाला किया.

अमावास्या की अँधेरी रातों में,

 बयार से लङ-झगङ कर…

तुम्हारी ख़ुशियों के लिए सोने सी सुनहरी रोशनी से जगमगाते रहे.

और आज उसी माटी में पड़े हैं…..

उसमें शामिल होने के लिए

जहाँ से जन्म लिया था.

यह थी हमारी एक रात की ज़िंदगी.

क्या तुम अपने को जला कर ख़ुशियाँ बिखेर सकते हो?

कुछ पलों में हीं जिंदगी जी सकते हो?

  सीखना है तो यह सीखो। 

 

 

Image courtesy- Aneesh