ख़ुशियों का समुंदर

अक्सर लगता है,

ग़ज़ब तनाव है ज़िंदगी में।

अजब ताव है फ़िज़ा में।

साया-ए-ग़म में साँसें है घुटी-घुटी।

हँसी की रौशनी जैसे लुटी-लुटी।

उदासी के अँधेरे में भाव बढ़ा जैसे चराग़ का।

सच यह है कि इसी उलझन का नाम है ज़िंदगी।

इसे मुस्कुरा कर जीना है बंदगी।

सामना करो, नाम दो पहचान दो एहसासों को।

भावनायें और दिलो-दिमाग़ ग़र सीख गए संभलना।

चाँद उतर आएगा फिर ख़ुशियों के समुंदर में।

International Stress Awareness Day-

Don’t become the slave of your emotions.

recognise your emotion and your triggers

and handle Them with care. Otherwise they’ll

Make you fragile.

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