इतना तो मेरा हक़ बनता था!

मालूम है कि ज़िंदगी है एक रंगमंच

और हम सब किरदार।

पर कौन है शेष रह गए कई अनुत्तरित

सवालों के जवाब का ज़िम्मेदार ?

सब जाएँगें ख़ाली कर बस्ती एक दिन।

पर ऐसे बिन बताए जाता है कौन?

बरहम….. आक्रोश, नाराज़गी जाती नहीं।

ज़वाब मिले, इतना तो मेरा हक़ बनता था।

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s