hello ज़िंदगी, पैग़ाम-ए-हयात

आ कर चले जातें है लोग, वहीं जहाँ से आए थे।

पर यहीं कहीं कुछ यादें , कुछ वादे छोड़ जातें हैं।

ग़ायब बस वह एक चेहरा होता है।

जो अक्सर तन्हाईयों को छूता रहता है।

बस रह जाती हैं कुछ कहानियाँ,

सुनने-सुनाने को, आँखें गीली कर जाने को।

साजो-सामान के साथ मेहमान

विदा होतें हैं, यादें क्यों छोड़ जातें हैं?

क्यों यह रस्म-ए-जहाँ बनाई? ऐ ज़िंदगी!

तुम्हारी अपनी,

पैग़ाम-ए-हयात

Meaning of some words-
पैग़ाम-ए-हयात- message of eternal love
तन्हाईयों – loneliness, solitude

6 thoughts on “hello ज़िंदगी, पैग़ाम-ए-हयात

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