ना तोड़ो नाज़ुक भरोसा

दिल बड़ा नाज़ुक होता है।

रिश्ते दिल के भरोसे पर टिके होते है।

उसके टूटने की आवाज़ नहीं होती।

पर भरोसा टूट जाये ,

तो ज़िंदगी के हर पल में,

हर लफ़्ज़ में इस की गूंज शामिल होती है

औ भरोसा करने की आदत छूट जाती है।

ना करो झूठे वादे, ना किसी का ऐतबार तोडो,

ना तोड़ो नाज़ुक भरोसा।

ये चोट रूह पर निशाँ छोड़ जाता है।

Psychological Fact – Pistanthrophobia is an

enormous fear of trusting people because of

awful past experiences / bad relationship.

11 thoughts on “ना तोड़ो नाज़ुक भरोसा

  1. अति सुंदर से भी अधिक सुंदर है आप की यह कविता | You deserve an award for such a beautiful poem and the feelings…. Wow. Very heart touching. Keep writing. Well done. 😊😊👏👏👏👏

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    1. तुम्हारे तारीफ़ से लिखने का हौसला मिलता है। 😊 हर बार तुम प्यारे तरीक़े से तारीफ़ करती हो। thanks a lot अपर्णा।

      Liked by 1 person

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