दर्द

You know too much
psychology when you
can’t get mad because you
understand everyone’s
reasons for doing
everything.

कई बार ख़ोजा लोगों में आईना, जो दिखा सके हमारा अक्स और नुक़्स।

मंज़िल की तलाश में ऊपर पहुँचने के लिए किसी को खींच कर नीचे करने की ज़रूरत नहीं। लोगों की टांगे खिंचते, दर्द पहुँचाते, कभी उनकी आँखों में झांक कर देखो। देखो दर्द और अपने लिए घृणा। इसके बाद क्या कभी आपने आप से प्यार कर पाओगे? कभी आइने में अपने आप से नज़रें मिला कर पूछो।

सिर्फ़ इक क़दम उठा था ग़लत राह-ए-शौक़ में। मंज़िल तमाम उम्र मुझे ढूँढती रही अब्दुल हमीद अदम

I’m so at peace, I don’t even want
any revenge. you won. just leave
me alone.

बदलते देखा समय, मौसम, दुनिया, लोग, एक बात समझ आई। सच और हक़ीक़त हो नज़र के सामने। पर बयाँ ना करो, अगर अच्छा कहलाना है। अगर हक़ीक़त बयान किया,

जुर्म का इक़रार हो

When wealth is lost, nothing is lost; when health is lost, something is lost; when character is lost, all is lost.

एक छोटी सी लौ भी अपने अंदर जलाए रखो, राहें आसान हो जाएँगी। जिस दिन स्वयं को पहचान लिया। अपना मोल जान लिया। आत्म प्रशंसा, अपने को बड़ा दिखाना

BEHIND EVERY
STRONG PERSON IS
A STORY THAT
GAVE THEM NO CHOICE.

कई बार दिल का दर्द और धोखे, दिल के दरवाजे और खिड़कियाँ बंद कर देते हैं। अंदर की घुटन ना बाहर निकलती है। ना बाहर किसी को दर्द समझ आता है। कभी-कभी जिंदगी में कोई ऐसा आता है जो बंद दरवाजे को खटखटाता है, खोलने की कोशिश करता है। दर्द और चोट गहरी है। तो द्वार बंद ही रहता है ।लेकिन कुछ जिद्दी खटखटाने वाले हर हालत में इस द्वार को खुलवा लेते हैं । शायद मरहम लगाने के लिए या फिर से दर्द और धोखा देने के लिए।


when the soul is pure. one write beautifully, cook testy and can do many great things in a great way. but they will have to face lots of reaction, resentment, refusal , revenge and many more negative attitudes of negative people around them.

The sign language is most intelligent but less perfect. The word language is most perfect but artificial

He didn’t like drama
and I was Shakespeare.

I still miss you but I don’t
want you back anymore.

ग़र दिल आपका नाज़ुक, कोमल और लोगों पर ऐतबार करने वाला है। तब लाज़िमी है चोटें भी बहुत आएँगी। दुनिया को रास नहीं आते ऐसे लोग। दर्द दे हर दिल को अपने जैसा बनाने वाले ढेरों है ज़माने में। क्योंकि पत्थर दिलवालों को वहम होता है कि इस दुनिया में सब उन जैसे पत्थर दिल हीं हैं।

वहम एक ज़हनी कैफ़ियत है और ख़याल-ओ-फ़िक्र का एक रवैया है जिसे यक़ीन की मुतज़ाद कैफ़ियत के तौर पर देखा जाता है। इन्सान मुसलसल ज़िंदगी के किसी न किसी मरहले में यक़ीन-ओ-वहम के दर्मियान फंसा होता है। ख़याल-ओ-फ़िक्र के ये वो इलाक़े हैं जिनसे वास्ता तो हम सब का है लेकिन हम उन्हें लफ़्ज़ की कोई सूरत नहीं दे पाते।

प्यार एक ऐसा अहसास है, जिसे जितना छुपाओ, उतना हीं उभरता हैं। जितना करो इनकार, उतना हीं बढ़ता हैं।

PSYCHOLOGY SAYS, IRONICALLY, THE
MORE YOU HIDE YOUR FEELINGS, THE
MORE THEY SHOW. THE MORE YOU DENY
THEM, THE MORE THEY GROW.

Have you ever lost all
respect for someone?
Like, you don’t hate them
but you don’t feel the need
to associate yourself or
say anything to them
anymore. क्या तुमने कभी सब खो दिया है किसी के लिए सम्मान? जैसे, आप उनसे नफरत नहीं करते लेकिन आपको इसकी जरूरत महसूस नहीं होती अपने आप को जोड़ने के लिए या उनसे कुछ भी कहो अब और।

If still there is hope and expectation,
than it’s not easy to move on.
The first step is to accept the reality,
stop expectations.
then comes the next step,
Now try to move on
although it’s not easy.
But it’s not impossible.

ज़िंदगी में कई बार हम समय के हाथों में रहतें हैं। कई सही बातें ग़लत समय पर सामने आतीं हैं। What if you meet the right person,
but at the wrong
time?

बार-बार चोट खा कर कई टूट जातें हैं। पर जो चोट खा कर भी मुस्कुराए। उनसे उलझने की गुस्ताख़ी ना करो। चोटों ने उन्हें ना टूटने वाला पाषाण…..फ़ौलाद बना दिया है। वे हर चोट के बाद अपने आप को सम्भालना सीख गए है।आघातों ने दुःसाहसी और ढीठ बना दिया है। ना रोने का ठान लिया है उन्होंने। PSYCHOLOGICALLY DAMAGED PEOPLE TEND
TO BE THE STRONGEST BECAUSE THEY
KNOW THEY CAN SURVIVE ANYTHING. PAIN
STRENGTHENS THE MIND.

We all react to trauma in different ways, experiencing a wide range of physical and emotional reactions. There is no “right” or “wrong” way to think, feel, or respond, so don’t judge your own reactions or those of other people. Your responses are NORMAL reactions to ABNORMAL events.

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