ज़िंदगी की राहें

ज़िंदगी की राहें

मज़बूत दिखने वालों

की सच्चाई यह होती है,

कि वे कई बार टूट

कर बने होते हैं।

ज़िंदगी की राहों पर,

वे अकेला चलना

सीख चुके होतें हैं।

9 thoughts on “ज़िंदगी की राहें

  1. हम लोग जान
    हम नहीं
    एक और व्यक्ति क्यों
    अपने ही जीवन से टूटा हुआ

    हम चले
    सभी समुदायों में
    बस हमारा अपना तरीका

    हम अपने दो पैरों पर खड़े हैं
    दूसरों के पैरों पर नहीं

    *

    ham log jaan
    ham nahin
    ek aur vyakti kyon
    apane hee jeevan se toota hua

    ham chale
    sabhee samudaayon mein
    bas hamaara apana tareeka

    ham apane do pairon par khade hain
    doosaron ke pairon par nahin

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