एकांत

एकांत

वह नशा है,

जिसकी लत लगे,

तो छूटती नहीं।

भीड़ तो वह कोलाहल है,

जो बिना भाव

मिलती है हर जगह।

4 thoughts on “एकांत

  1. सच कहा आपने रेखा दीदी 👌🏼
    भीड़ में हम अपनी पहचान भूल जाते हैं ओर एकांत व मौन वो समय है जब हम स्वंम की पहचान पाते हैं ।

    Liked by 1 person

  2. सच है।

    आह ये महकी हुई शामें, ये लोगों के हुजूम
    दिल को कुछ बीती हुई तनहाइयां याद आ गईं

    Liked by 1 person

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