शुभ अक्षय तृतीया Happy Akshay Tritiya !!!

In Sanskrit, the word “Akshayya” (अक्षय्य) means ” never endingness ” in the sense of “prosperity, hope, joy, success”,

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  • महर्षी परशुराम का जन्म आज ही के दिन हुआ था ।
  • माँ अन्नपूर्णा का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था
  • द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था ।
  •  कृष्ण और सुदामा का मिलन आज ही के दिन हुआ था ।
  • कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था ।
  • सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ आज ही के दिन हुआ था ।
  • ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी आज ही के दिन हुआ था ।
  • प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्री नारायण जी का कपाट आज ही के दिन खोलाजाता है ।
  •  बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में साल में केवल आज ही के दिन श्री विग्रहचरण के दर्शन होते है अन्यथा साल भर वो बस्त्र से ढके रहते है ।
  •  इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था ।

अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहतेहैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षयफल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयं सिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है।

5 thoughts on “शुभ अक्षय तृतीया Happy Akshay Tritiya !!!

  1. क्या आप कृपया मुझे समझा सकते हैं
    – क्यों मंदिर
    — नहीं
    – हर इंसान में पाया जा सकता है?

    – सबसे पवित्र स्थान क्यों
    – में
    — लोग स्व
    —- नहीं
    – हम सब से हर दिन
    — खोजा
    —– बन जाता है?

    – आध्यात्मिक गुरु क्यों कह सकते हैं
    – वे बाहर से प्रतीकों के माध्यम से हैं,
    – सच के साथ
    – अपने सभी बुनियादी दृष्टिकोण में
    – वास्तविक संपर्क में?

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    1. मंदिर और भगवान हम सब के अंदर – ‘ स्व’ हर इंसान में होता है। बस उसे पहचाना और खोजना ज़रूरी है। सच्चा आध्यात्मिक गुरु अपने आप को पहचानना सिखाते हैं।
      बाहरी प्रतीक / भगवान की मूर्ति ध्यान लगाने का पहला कदम है। यह सीखने के बाद आप बिना प्रतीकों के, अपने आप ध्यान लगा सकते है।

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      1. Thank you for your reply.

        The soul is my teacher
        the mistress of my life

        The soul
        told me as a child
        and this was
        my parents
        spiritual teachers
        a thorn in

        “what you see
        – what you experience
        – with all your senses
        — the humans
        —– the living
        —– the cosmos
        —— me the soul
        ——- I am the universe
        ——– I am the macrocosm in you ”

        Best regards
        Hans Gamma

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