नासमझी की इंतहा !

कहाँ जा रहें हैं हम सब? क्या जितने डाक्टर और नर्सें कोरोंना की बलि चढ़ रहे हैं, उतने फिर से तैयार हो सके है? अपना जीवन दाव पर लगा जीवन देने वालों का यह हश्र? उनकी भूलों को खोज रहे सब, अपनी ग़लतियाँ भूल कर। क्यों कोरोना फैला इस कदर? खोज़ सको तो खोज लो।

13 thoughts on “नासमझी की इंतहा !

  1. अगर अस्पताल प्रशासन से कोई लापरवाही हुई है, तो मरीज के परिवारजनों का रोष स्वाभाविक है। किंतु किसी भी प्रकार से इस स्तर की हिंसा जायज़ नहीं है।

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    1. बिलकुल सही। पर अगर bed / दवाइयाँ / आक्सीजन नहीं है । तब वे क्या करेंगे? और दूसरी बात है – काम करनेवालों से ही ग़लतियाँ होतीं हैं। उस के लिए यह तरीक़ा जायज़ नहीं।

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      1. सही कहा, गुस्सा इंसान के दिमाग पर परदा डाल देता है। फिर उसे सही-गलत में अंतर दिखना बंद हो जाता है।

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  2. ये‌ बिल्कुल भी सही नहीं है । इस समय की स्थिति को लोगों को समझना चाहिए ।
    बेड और आक्सीजन उपलब्ध नहीं है या कमी है , इसमें डाक्टरों या हेल्थ कर्मियों की गलती नहीं है ।
    वैसे मेरा मानना है यह कहीं ना कहीं हमारी मौजूदा सरकार की नाकामी है । पिछली बार कोरोनावायरस की पहली लहर से सीखकर या दूसरे देशों से सीखकर हमारी पहली प्राथमिकता स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना होना चाहिए था ।
    पर इसमें भी लोगों को राजनीति दिखी ।। और जिस तरह कुंभ मेला और चुनावी रैलियां आयोजित की गयी । शायद इस पे कुछ बोलने की जरूरत नहीं है ।
    सही समय पर किस चीज की जरूरत है ,भविष्य का ध्यान रखते हुए जरुर विचार करना चाहिए ।

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    1. आपके मूल्यवान विचार बिलकुल सही हैं। आज हर व्यक्ति कोरोना की वजह से भयभीत है और तनाव में हैं। और व्यवस्था बिलकुल चरमरायी हुई है। ऐसे में एक दूसरे पर आक्रोश निकालना नासमझी है, विशेष कर डॉक्टरो और स्वस्थ कर्मियों पर।

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      1. सही कहा आपने । इस समय एक दूसरे पर रोष करने की जगह एक दूसरे का साथ देना चाहिए। जिससे हम इस मुश्किल घड़ी से बाहर निकल सके ।

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      2. बिलकुल, जब व्यवस्था साथ ना दे तब तो एक दूसरे का साथ दे कर ही काम निकालना होगा। आज ऐसा एक भी परिवार नहीं है, जिसने कोरोना की वजह से किसी को खोया ना हो।

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      3. जी बिल्कुल। इस समय हर परिवार इस महामारी का शिकार है । आशा करते हैैं, जल्द ‌‌‌ही स्थिति सामान्य हो ।🙏🙏

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    1. हाँ, डाक्टर और स्वास्थ कर्मचारी मेहनत कर रहे हैं। उन की गिनती कम होती जा रही है । कुछ कोरोना के शिकार हो रहे हैं और कुछ नौकरी छोड़ रहे हैं।
      यह तो हम सब को समझना होगा।

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