पहचान

लोगों के चेहरे देखते देखते ज़िंदगी कट गई।

चेहरे ना अभी तक नहीं आया।

मेरी बातें सुन आईना हँसा और बोला –

मैं तो युगों-युगों से यही करता आ रहा हूँ।

पर मेरा भी यही हाल है।

लोग रोज़ चेहरे बदलते रहते हैं।

सौ चेहरे गढ़, मुखौटे लगा, रिश्वत देते रहते हैं,

मनचाहा दिखने के लिए!

पल-पल रंग बदलते चेहरे,

चेहरे में चेहरा ढूँढने और पहचानने की कोशिश छोड़ो।

अपने दिल की सुनो,

दूसरों को नहीं अपने आप को देखो।

5 thoughts on “पहचान

  1. बात वही पुरानी है रेखा जी कि – दिल को देखो, चेहरा न देखो, चेहरों ने लाखों को लूटा, दिल सच्चा और चेहरा झूठा ।

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