जिंदगी के रंग -207

प्रश्न  बङा कठिन है।

 दार्शनिक भी है, तात्त्विक भी है।

पुराना  है,  शाश्वत-सनातन भी  है।

तन अौर आत्मा या कहो रुह और जिस्म !!

इनका  रिश्ता है  उम्रभर का।

खोज रहें हैं  पायें कैसे?

 दोनों को एक दूसरे से मिलायें कैसे?

कहतें हैं दोनों  साथ  हैं।

फिर भी खोज रहें हैं – मैं शरीर हूँ या आत्मा? 

चिंतन-मनन से गांठें खोलने की कोशिश में,

 अौर उलझने बढ़ जातीं हैं।

मिले उत्तर अौर राहें, तब बताना।

 पूरे जीवन साथ-साथ हैं,

पर क्यों मुश्किल है ढूंढ़ पाना ?

 

 

11 thoughts on “जिंदगी के रंग -207

  1. Who knows what we are ? What is the thing inside us which keeps us alive ,everbody says it’s all because of God’s grace that we are here. My body is made up matter means i am created from sub atomic particles and this is still a question infront of quantum physics to tell exactly the structure of subatomic particle. Actually it is a quite controversial topic and people have made their own understanding on it .

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    1. I agree with you.
      The search of – who am I?
      or you may say – What I am? are almost same quest.
      But we can’t deny, that There is some power.
      Some call it God, some Alien or Science…….
      Thanks for sharing your views.

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  2. सब कुछ है और सब कुछ लेकर ही चलना होगा उस एक के तरफ। वो कहते है न हजारों रास्ते है पर सबकी मंजिल एक ही है “वो चिदानंद”।
    हमारी संस्कृति कि यही खुबी है। जिसे जो अच्छा लगता है वो रास्ता ले लो और परमपिता तक पहुँच जाओ। राम वाले राम के तरफ, कृष्ण वाले कृष्ण के तरफ, भोले वाले भोले बाबा के तरफ।
    जैसे खाना बनाते वक्त उद्देश्य एक ही है स्वादिष्ट बनाना। इसलिए तरह तरह के मसाले इस्तेमाल करते है। ठीक एैसे ही ज़िंदगी भी है मोक्ष के तरफ जाना है तो सुख में फसो नहीं और दुःख में रो नहीं। जो मिला सो मिला। सब यही छुटेगा। जो नहीं छुटेगा उसे पकड़ते है।

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    1. हाँ, हमारे धर्म की सबसे बङी उपलब्धि मोक्ष हीं है।
      तुमने बङी गहरी अौर अनमोल बातें कह दी हैं शैंकी। मुझे लगता है, तुम्हारी उम्र ज्यादा नहीं है। फिर इतनी अच्छी बातें, आध्यात्मिक बातें कैसे समझते हो?

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      1. माँ गीता की कृपा और लोगों को पढ़ने की आदत। मुझे बहुत अच्छा लगता है लोगों को पढ़ना। क्योंकि मैं मानता हूँ कि बिना पढ़ें कोई लिख नहीं सकता है। इसलिए मैं पढ़ता हूँ और लिखता हूँ।

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      2. बिलकुल सही करते हो. अच्छा लिखने के लिए ख़ूब पढ़ना ज़रूरी है. ज्ञान बढ़ता है और लिखने की समझ भी आती है.

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