बेख़ुदी में

क़बूल भी नहीं कर सकते और इनकार भी नहीं कर सकते……

सचमुच देखा था तुम्हें क़रीब अपने.

हाथ भी बढ़ाया छूने के लिए.

तभी नींद खुल गईं और देखा बाहें शून्य में फैलीं हैं.

शायद सपने में घड़ी की सुईयों को पीछे घुमाते चले गए थे.

शायद बेख़ुदी में तुमको पुकारे चले गए थे.

 

Image- Aneesh

20 thoughts on “बेख़ुदी में

      1. 🌸so beautiful …He is with you … You can feel him around you , isn’t ☺❤

        मेरी एक कविता आप दोनों के लिए🌸

        दूर कहाँ ??

        तुम तो मेरे सबसे करीब हो

        विकट से विकट छणों में सबसे निकट हो

        हाँ , अब तुम मेरी निकटता पर संशय कर सकते

        किसी तीसरे का दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सकते

        अनुपात , क्षेत्रफल , वेग आदि गणितीय दूरी माप सकते

        एक-दूजे की नजदीकियों पर प्रशनचिन्ह लग सकते

        पर सत्य बड़ा सात्विक सरल है !!

        मेरे सम्मुख खड़ा सजीव व्यक्ति भी मुझसे कोसों दूर है

        तन-मन , तम-ताप , उत्सव-उल्लास हर जगह तुम साथ , मेरे करीब हो

        शायद इसीलिये तुम 

        ब्रम्हाण्ड के दूसरे सिरे से भी साफ साफ नजर आ रही हो….

        साफ साफ नजर आ रही हो….

        —-Nimish

        Liked by 2 people

      2. So sweet of you Nimish!! तुमने तो मुझे emotional कर दिया.
        बहुत सुंदर, प्यारी सी कविता है. मैं इसे ब्लॉग पर डाल दूँ क्या? तुम्हारे नाम के साथ ?
        Lots of love and blessings!!!!

        Liked by 1 person

      3. ये मेरे लेखन से कमाई सबसे बड़ी पूंजी है आप सभी की ढ़ेर सारी blessings 🌸❤

        जरूर ब्लॉग पर डालिये ☺प्रणाम❤

        Liked by 1 person

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