जागता रहा चाँद

जागता रहा चाँद सारी रात साथ हमारे.

पूछा हमने – सोने क्यों नहीं जाते?

कहा उसने- जल्दी हीं ढल जाऊँगा.

अभी तो साथ निभाने दो.

फिर सवाल किया चाँद ने –

क्या तपते, रौशन सूरज के साथ ऐसे नज़रें मिला सकोगी?

अपने दर्द-ए-दिल औ राज बाँट सकोगी?

आधा चाँद ने अपनी आधी औ तिरछी मुस्कान के साथ

शीतल चाँदनी छिटका कर कहा -फ़िक्र ना करो,

रात के हमराही हैं हमदोनों.

कितनों के….कितनी हीं जागती रातों का राज़दार हूँ मैं.

8 thoughts on “जागता रहा चाँद

  1. हाँ चाँद हूँ मैं,
    कितनों के….कितनी हीं जागती रातों का राज़दार हूँ मैं।

    बहुत खूबसूरत।👌👌

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    1. नींद ना आने पर चाँद से बातें करने का अपना लुत्फ़ है. शुक्रिया मधुसूदन.

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