अन्त:मन

फारसी कवि उमर खय्याम की रूबैयात जीवन की संक्षिप्तता अौर अल्प अस्तित्व को दर्शाता है । कवि के लिए, जीवन एक शाश्वत वर्तमान है, जो अतीत और भविष्य दोनों से परे है।

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इस जीवन के बाद के जीवन के सत्य को जानने की लालसा में

         अपने अदृश्य आत्मा…..अंतरात्मा को टटोला।

                        अन्त:मन से जवाब मिला- 

                                 स्वर्ग-नर्क, जन्नत-दोजख सब यही हैं, हमारे अंदर है

I sent my Soul through the Invisible,
Some letter of that After-life to spell:
And by and by my Soul return’d to me,
And answer’d: ‘I Myself am Heav’n and Hell

 Omar Khayyám ❤

Translation by- Rekha Sahay          

Image courtesy – Aneesh

13 thoughts on “अन्त:मन

    1. येहु ऐसा संसार है, जैसा सेमल फूल।
      दिन दस के ब्यौहार कौं,झूठे रंग न भूल।।
      सच है हम लोगों का क्षणभंगुर जीवन , सेमल के फूल के रुई की तरह कब उड़ जाता है, पता नही चला. जीवन के झूठे रंगों पर अभिमान नहीं करना चाहिये।

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