प्राचीनतम पाठशाला

एक दिन मौका मिला जीवन के

प्राचीनतम पाठशाला से

शाश्वत सत्य का सबक लेने का-

“मैं” को आग में धधकते और भस्म होते देखा ,

महसूस हुआ एक रिश्ता खो गया,

फिर खुद से मुलाकात हुई ।

समझ आया जब जीवन का यह हश्र होना है,

तब मिथ्या मोह, अहंकार, गुमान, गरूर किस काम का?

 

Image courtesy- Aneesh.

 

 

11 thoughts on “प्राचीनतम पाठशाला

      1. आदरणीय दीदी आपसे बात हो सकती है क्या 8871288482

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      2. Didi aap एक बहुत अच्छे राइटर हो आपका आशीर्वाद चाहिए और मार्गदर्शन मुझे ओर कुछ नही

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  1. यही अपेक्षा थी आपसे हमे यू ही आप का आशीर्वाद बना रहे हम पर

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