सैलाब

गीले आँखों से बरसते सैलाब को

देख जाती हुई बारिस ने भी

रुक कर साथ देना तय कर लिया है.

9 thoughts on “सैलाब

  1. वाह! खूबसूरती से अपने मन की बात कही है आपने | 
    अच्छा है ‘जाती’ बारिश ने साथ दिया है,  क्या पता जाते जाते इस सैलाब को भी साथ ले जाये |

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    1. आपकी बातें हमेशा हिम्मत और हौसला बढ़ाती हैं। बहुत आभार पढ़ने और पसंद करने के लिए।

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  2. बहुत ख़ूब ! बहुत ख़ूब रेखा जी ! आपने मुकेश जी का अमर गीत तो सुना ही होगा : तेरी याद दिल से भुलाने चला हूँ । इस गीत का एक अंतरा है :
    घटाओं, तुम्हें साथ देना पड़ेगा
    मैं फिर आज आँसू बहाने चला हूँ

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    1. शुक्रिया जितेंद्र जी. आप बिलकुल सही सटीक पंक्तियाँ लिखते हैं. जो क़ाबिले तारीफ़ है.

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