20 thoughts on “जंग

    1. निरंतर, अभ्यास , परिश्रम और चेष्टा से सफलता मिल हीं जाती है.
      करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान।
      रसरी आवत जात तें, सिल पर परत निसान।।

      Liked by 2 people

      1. 😂 मैंने भी बचपन से यही सुना है , इसलिए दोहरा दिया . Sorry !
        इसलिए तो try try again बताया था .

        Liked by 1 person

      2. मैं पटना से हूँ और मेरी माँ टीचर रहीं हैं हिंदी की. यह सब सुन कर हीं बड़े हुए ….

        Liked by 2 people

      3. 😂😂 मैं तुम्हारी हालत समझ सकतीं हूँ .
        Enjoy करो हिंदी … वरना आजकल तो अच्छी हिंदी कम हीं पढ़ने -सुनने को मिलती है .

        Liked by 2 people

  1. बेहतरीन छोटीसी लाइनें हैं और सन्देश बड़ा |
    एक बहुत ही छोटा सा फर्क है नीचे की मेरी पंक्तियों में :

    कुछ पाने के प्रयास को क्यूँ जंग समझें हम
    सफलता के लिए जरूरी है श्रम और उद्यम
    तकदीर भी साथ दे, तो होता है सोने में सुहागा
    भाग्य-भरोसे वालों के हाथ आती सिर्फ हताशा |

    Liked by 2 people

  2. भाग्य भरोसे किसको यहाँ मिला है।कर्मभूमि है कर्म तो करना पड़ेगा। मुश्किलों से लड़ना पड़ेगा। बहुत खूब।👌👌

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s