8 thoughts on “रेशम

  1. दिल को चीर देने वाली हक़ीक़त है ये रेखा जी । भरोसा करने वाले सपने कांच के बने होते हैं जबकि दुनियावी हक़ीक़त की ज़मीन पथरीली होती है । उस हक़ीक़ी पथरीली ज़मीन से टकरा कर भरोसे की डोर भी टूटती है और शीशे से बने सपने भी ।और उस टूटन से उठने वाला दर्द जानलेवा होता है रेखा जी । मुकेश जी का गाया हुआ अमर गीत इसी दर्दीली सच्चाई को बयां करता है :
    दोस्त दोस्त ना रहा, प्यार प्यार ना रहा
    ज़िंदगी हमें तेरा ऐतबार ना रहा

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    1. आपने बिलकुल सही कहा. हम सब यह जानते है कि हक़ीक़त पथरीली होती है, फिर भी ….
      सबसे बड़ी बात यह है कि जब तक अपने ऊपर गुज़रता नहीं है . तब तक हम इसे ठीक से समझ नहीं पाते.
      मुकेश जी का गीत सच्चाई के क़रीब है.
      आपका आभार .

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