नीड़

वह नीड़ ….

वह घोंसला…

अब सूना था .

नन्हें किलकते बच्चे ,

पंख निकलते उड़ गए

किसी अनजानी दिशा में.

इंसानों के हों या परिंदों के.

रह गए कुछ सूखे पत्ते

कुछ नन्हें पंख ……

कुछ पुरानी किताबें

कुछ तस्वीरें …….

15 thoughts on “नीड़

      1. Yes the translator doesn’t give the meaning or context of words haha. But it translates the words in english so that I can read them, and I truly liked what I read and thank you so much for elaborating even further Rekha 💯✌️✌️😄

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  1. क्या खूब लिखा है। यादें मिटती नहीं।
    निशानियां अब भी बयान करते हैं वो पल
    जब वो छोटा था और हम जवां,
    अब हम बूढ़े है और वो कहाँ।
    सुना है
    नीड,घोषला,
    मन,
    हृदय
    गलियाँ
    और आशियाँ।

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    1. नीड़ छोड़ कर उड़ जाते हैं परिंदे , जैसे बच्चे बड़े हो घर से दूर चले जातें हैं, बस यादें छोड़ जाते हैं.
      बहुत धन्यवाद मधुसूदन अपने विचार बाँटने के लिए .

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