ज़िंदगी के रंग – 176

आने वाले कल

आएगा या नहीं, मालूम नहीं.

फिर भी सारी कायनात……

सारी योजनाएँ…….

उस पर टिकी होतीं हैं.

और बीते पतझड़ जिनका

अब कोई अस्तित्व नहीं,

उनके सूखे, पीले, उदास पत्ते,

बीते कल की ओर

खींच ले जाते हैं.

अपना आज हम सब

इन्हीं की सोचँ में बीता देते हैं.

15 thoughts on “ज़िंदगी के रंग – 176

  1. सही कहा आपने जो गया उसके गम को लेकर बैठे रहते हैं और जिसका अता-पता ही नहीं उसकी चिंता अभी से पर जो हो रहा है उसमें नहीं जीएंगे।

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  2. सही कहा आपने लोग जो बीत गया उसके गम को लेकर बैठे रहते हैं और जिसका अता-पता ही नहीं उसकी चिंता अभी से करते हैं पर जो चल रहा है उसमें नहीं जीएंगे।

    Liked by 1 person

      1. आप बोल रहे हों ना मैं अक्सर ऐसी गलतियां करती हूं…बस उसी के लिए बोल रही हूं कि कोई बात नहीं हो जाती है गलतियां।

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    1. आप की बातों में सच्चाई है. जिसने यह सीख लिया वह सामान्य मानव से श्रेष्ठ हो जाएगा .

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