ज़िंदगी के रंग – 175

You have to keep breaking your heart until it opens.

Rumi

टूटे हैं तो क्या हुआ ?

टूट कर गिरते तारे ,

टूट कर बरसते बादल देखे हैं….

हर दर्द कुछ सबक़ ले कर आती है .

टूटने और बिखरने

का भी अपना मज़ा है.

10 thoughts on “ज़िंदगी के रंग – 175

  1. बिल्कुल सही बात है रेखा जी । प्रसिद्ध गीत ‘जिसका कोई नहीं, उसका तो ख़ुदा है यारों’ का एक अंतरा है –

    हम क्या हैं, वो फ़रिश्तों को आज़माता है
    बनाकर हमको मिटाता है, फिर बनाता है
    आदमी टूट के सौ बार जुड़ा है यारों.

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    1. हमेशा की तरह, आपने बेहद ख़ूबसूरत गीत के अंतरा की चर्चा कर मेरी लिखी पंक्तियों का मान बढ़ा दिया और मेरा हौसला भी.
      आभार जितेंद्र जी.

      Liked by 1 person

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