ज़िंदगी के रंग- 158

जिंदगी संघर्षों से बनती है,

संघर्ष हीं ज़िंदगी है का दूसरा नाम.

जैसे कश्तियां पानी में डूबती है ,

और पानी से ही तैरती हैं.

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by Rekha Sahay
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13 thoughts on “ज़िंदगी के रंग- 158

  1. बहुत खुब कहा।👌👌
    संघर्ष के बिना जिंदगी नही,
    और जिंदगी है तो
    संघर्ष नही
    ये कहना नामुमकिन।

    Liked by 2 people

    1. इसी का नाम है ज़िंदगी.वरना बिना संघर्षके ज़िंदगीमेंकुछ भी नहीं मिलता.

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    1. यह सच्ची बात मैंने अपनी ज़िंदगी से सीखा हैं . शायद इसलिए आपको इसमें गहराई नज़र आ रही है.

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