पाषाण (कविता )

rock

 

एक थी खूबसूरत सी लड़की,

 सब से नाराज़, बेजार , 

उखड़ी -उखड़ी , थोड़ी  कटी-कटी.

पूछा , तब उसने बताया –

तलाकशुदा हैं ,

इसलिये कुछ  उसे उपलब्ध मानते हैं.

कुछ चुभने वाली बातें करते हैं.

किसी ने कहा – इन बातों से भागो  मत.

जवाब दो , सामना करो.

अगली बार छेड़े जाने पर उसने ,

पलट कर कहा – हाँ, अकेली हूँ.

पर क्या तुम पत्थर हो ? पाषाण हो 

क्या तुम्हारे घर की लड़कियों के साथ ,

ऐसा नहीँ हो सकता ?

मदद नही कर सकते हो , ना करो.

पर अपमानित तो मत करो.

 

images from internet.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

9 thoughts on “पाषाण (कविता )

    1. धन्यवाद सनी , अभी भी हम सबों को बहुत कुछ सीखना होगा. दूसरों के दर्द को महसूस करने की समझ कम लोगों में होती हैं.

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      1. हाँ , यह सब मैंने भी जब सुना और जाना , तब बड़ी तकलीफ हुई थी. हमारे समाज में बदलाव की ज़रूरत हैं.

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