मेरा अजनबी भाई ( एक अनोखी और सच्ची कहानी )

मेरे जीवन में कुछ रहस्यमय घटनाएँ हुई हैं। जिन्हे याद कर मै रोमांचित हो जाती हूँ। यह वास्तविक घटना सन 1991 की है। तब हम घाटशिला नाम के छोटे से शहर में रहते थे । एक बार हम सभी कार से राँची से घाटशिला लौट रहे थे। यह दूरी लगभग 170 किलोमीटर थी। यह दूरी समान्यतः चार घंटे में हम अक्सर तय करते थे।

शाम का समय था। सूरज लाल गोले जैसा पश्चिम में डूबने की तैयारी में था। मौसम बड़ा सुहाना था। यात्रा बड़ी अच्छी चल रही थी। मेरे पति  कार चला रहे थे। साथ ही गाना गुनगुना रहे थे। मेरी आठ वर्ष की बड़ी बेटी  व एक वर्ष की छोटी बेटी कार के पीछे की सीट पर आपस में खेलने में मसगुल थीं।

तभी एक तेज़ आवाज़ ने हम सभी को भयभीत कर दिया। कार तेज़ी से आगे बाईं ओर झुकती हुई सड़क पर घिसटने लगी। अधर ने किसी तरह कार को रोका। कार से बाहर आकर हमने देखा कि आगे का बायाँ चक्का अपनी जगह से पूरी तरह बाहर निकाल आया है। कार रिम के सहारे घिसती हुई रुक गई थी। कार का चक्का पीछे सड़क के किनारे पड़ा था। हम हैरान थे कि ऐसा कैसे हुआ? एक भयंकर दुर्घटना से हम बाल-बाल बच गए थे।

एक बड़ा हादसा तो टल गया था। पर हम चिंतित थे। शाम ढाल रही थी। शहर से दूर इस सुनसान जगह पर कार कैसे बनेगी? सड़क के दूसरी ओर मिट्टी की छोटी सी झोपड़ी नज़र आई। जिसमें चाय की दुकान थी। मेरे पति उधर बढ़ गए। मैं कार के पास खड़ी थी। तभी मेरी नज़र कार के पीछे कुछ दूर पर गिरे एक नट पर पड़ी। मैंने उसे उठा लिया। किसी अनजान प्रेरणा से प्रेरित मैं काफी आगे तक बढ़ती गई। मुझे और भी नट व बोल्ट मिलते गए और मैं उन्हे उठा कर अपने साड़ी के पल्लू में जमा करते गई। जबकि मैं यह भी नहीं जानती थी कि वे किसी काम के हैं या नहीं।

मैं जब वापस लौटी तब अधर मेरे लिए परेशान दिखे। तब तक हमारी कार के पास कुछ ग्रामीण इकट्ठे हो गए थे। उनमें से एक चपल सा दिखने वाल साँवला, कद्दावर व्यक्ति मदद करने आगे आया। उसके चपटे, बड़े से चेहरे पर चोट के निशान थे और छोटी-छोटी आँखों में जुगनू जैसी चमक थी। मेरे पास के नट व बोल्ट देख कर वह उत्साहित हो गया। उसने कहा- “दीदी जी, आपने तो सारे नट-बोल्ट जमा कर लिए हैं। लाईये मैं आपकी कार बना देता हूँ। मुझे यह काम आता है।” तुरंत उसने कुछ ग्रामीणों को पास के गाँव से कुछ औज़ार लाने भेजा। उसके “दीदी” संबोधन और ग्रामीणो पर प्रभाव देख कर हमें तस्सली हुई। चलो, अब कार बन जाएगी।

अधर ने मुझे और बच्चों को चाय की दुकान पर बैठा कर चाय दिलवाई और स्वयं कार ठीक करवाने लगे। चाय वाला मुझसे बार-बार कुछ कहने की कोशिश कर रहा था। चाय वाले ने फुसफुसाते हुए मुझ से कहा- ” आप यहाँ मत रुकिए। अब रात भी हो रही है। आप के साथ बच्चे भी हैं। तुरंत यहाँ से चले जाइए। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह ऐसी बातें क्यों कर रहा है। चाय वाले ने फिर मुझसे कहा- ” वह व्यक्ति बड़ा खतरनाक है जो आपलोगों की सहायता कर रहा है। यहाँ पर होनेवाले ज़्यादातर अपराधों में यह शामिल होता है। हाल में हुए हत्या का आरोपी है। आप यहाँ मत रुकिए। थोड़ी देर में मेरी दुकान भी बंद हो जाएगी। यह तो बड़ा दुष्ट व्यक्ति है। पता नहीं, कैसे आपकी मदद कर रहा है। यहाँ सभी उससे बड़ा डरते है।” वह लगातार एक ही बात तोते की तरह रट रहा था -“आप बच्चों को ले कर जाइए। मत रुकिए।” चाय दुकान में बैठे अन्य लोगों ने भी सहमति में सिर हिलाया अौर बताया कि वह व्यक्ति वहाँ का कुख्यात अपराधी है।

मै घबरा गई। मुझे याद आया कि मेरे काफी गहने भी साथ है क्योंकि, मैं एक विवाह में शामिल होने राँची गई थी। मैंने अपने पति को सारी बात बताने की कोशिश की। पर वह अनजान व्यक्ति लगातार अपने पति के साथ बना रहा। वह मुझे  अकेले में बात करने का अवसर नहीं दे रहा था। मुझे परेशान देख , उस अजनबी ने मुझे समझाते हुए कहा- “दीदी, आप घबराइए मत। हम हैं ना। भय की बात नहीं है। हमारे रहते यहाँ आपको कोई परेशान नहीं कर सकता। वह हमें रोकने का जितना प्रयास कर रहा था। मन में उतना ही डर बढ़ता जा रहा था। उसकी मीठी-मीठी बातों के पीछे षड्यंत्र नज़र आ रहा था।

मैंने किसी तरह अवसर निकाल कर अपने पति को सब बातें बताईं। पर वहाँ से जाने का कोई साधन नहीं था। अब क्या करूँ। कुछ समझ नहीं आ रहा था। अँधेरा घिरना शुरू हो चुका था। तभी एक राँची जाने वाली एक बस आती नज़र आई। ग्रामीणों ने बताया कि बस यहाँ नहीं रुकती है। घबराहटवश, मैं बीच सड़क पर खड़ी हो गई।  बस को रोकने के लिए हाथ हिलाने लगी। बस रुक गई। बस वाले ने मेरी परेशानी और बच्चों को देख कर हमें बैठा लिया। वह अजनबी लगभग गिड्गिड़ाने लगा। “दीदी जी, मैं जल्दी ही कार बना दूँगा। आप मत जाइए।” वह मेरे पति का हाथ पकड़ कर अनुरोध करने लगा।
कुछ सोचते हुए मेरे पति ने मुझे दोनों बेटियों के साथ बस में बैठा दिया और मेरे जेवरों का सूटकेस भी साथ दे दिया। वे स्वयं वहाँ रुक गए। मेरा दिल आशंकाओं से भर गया। पर उन्हों ने आश्वासन देते हुए मुझे भेज दिया।

राँची पहुँच कर अपने घर में मैंने सारी बातें बताई। उन्होंने तत्काल कारखाने (कार सर्विसिंग ) में फोन किया। दरअसल उस दिन सुबह ही हमारी कार वहाँ से धुल कर आई थी। पता चला कार सर्विसिंग वालों के भूल के से यह दुर्घटना हुई थी। कार के चक्कों के नट-बोल्ट उन्होंने लगाया गया था। पर औज़ार से कसा नहीं था। कार सर्विसिंग के मालिक ने अपनी गलती मानी। तुरंत ही कार सर्विसिंग वालों ने एक कार और कुछ मेकैनिकों को हमारे यहाँ भेजा। जिससे वे अधर और मेरी खराब कार को सुधार कर वापस ला सकें।
कार सर्विसिंग कें लोग मुझ से कार खराब होने की जगह को समझ ही रहे थे। तभी मैंने देखा मेरे पति  अपनी कार ले कर आ पहुंचे हैं। मै हैरान थी। उन्हों ने बताया कि बड़ी मेहनत से उस व्यक्ति ने कार ठीक किया। कार के रिम को सड़क से ऊपर उठाने और चक्के को सही जगह पर लगाने में उसे बड़ी कठिनाई हुई थी। पर वह लगातार मेरे अकेले लौटने का अफसोस कर रहा था।

मैं इस घटना और उस अजनबी को आज भी भूल नहीं पाती हूँ। कौन था वह अजनबी? वह मुझे दीदी-दीदी बुलाता रहा। पर घबराहट और जल्दीबाजी में मैंने अपने अनाम भाई का नाम तक नहीं पूछा । क्या ऐसे अजनबी को भुलाया जा सकता है? मैं आज भी इस घटना को याद कर सोंच में पड़ जाती हूँ । क्यों कभी एक अपराधी भी मददगार बन जाता है? उस दिन मैंने मान लिया कि बुरे से बुरे इंसान में एक अच्छा दिल होता है।
ऐसे में मेरी नज़रें ऊपर उठ जाती है और हाथ नमन की मुद्रा में जुड़ जाते हैं। जरूर कोई अदृश्य शक्ति हमारी रक्षा करती है। हम उसे चाहे जिस नाम से याद करें- ईश्वर, अल्लाह, क्राइस्ट  ………..

26 thoughts on “मेरा अजनबी भाई ( एक अनोखी और सच्ची कहानी )

  1. kuch aise log hamari zindagi se gujarte hai jinki pehchan to chhupi reh jati hai par unke nishan hamesha taza bane rehte hai.
    bahut hi rochak or dilchasp thi apki ye aap biti………

    Like

    1. बिलकुल सही कहा . जीवन में चमत्कार होते रहते हैं. जो इस बात की पुष्टि करता है. आपका आभार .

      Like

  2. It happened for sometime,But it is restored long back.
    Pl log ravisingh.blog.If you face problem,pl do share with me!
    Nice to hear from you.I loved your comments.Do you live in Ranchi?

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s